
Astrology and Vastu Services in India | Kundli, Manglik Dosha & Lal Kitab Remedies | Kundli Guru
इष्ट देव वह विशेष देवता होते हैं जिनकी आराधना व्यक्ति के लिए सर्वाधिक शुभ, फलदायी और मानसिक रूप से संतुलन देने वाली मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार हर व्यक्ति की जन्म कुंडली में एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रवृत्ति निहित होती है, और उसी के अनुरूप उसके इष्ट देव का निर्धारण किया जाता है।
आज के समय में बहुत से लोग अनेक देवताओं की पूजा करते हैं, परंतु जब पूजा जन्म कुंडली के अनुसार की जाती है, तभी उसका प्रभाव गहराई से जीवन में दिखाई देता है।
इष्ट देव की आराधना केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि एक ज्योतिषीय और आध्यात्मिक सिद्धांत है। सही इष्ट देव की उपासना से:
जीवन की बाधाएँ धीरे-धीरे कम होती हैं
मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है
निर्णय क्षमता बेहतर होती है
भाग्य का सकारात्मक सहयोग मिलने लगता है
इसी कारण प्राचीन ऋषि-मुनियों ने कहा है कि सभी देवताओं की पूजा समान फल नहीं देती।
इष्ट देव का निर्धारण केवल राशि देखकर नहीं किया जा सकता। इसके लिए जन्म कुंडली का गहन अध्ययन आवश्यक होता है। मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं का विश्लेषण किया जाता है:
व्यक्ति की मूल प्रकृति और जीवन मार्ग का संकेत देता है।
पूर्व जन्म के संस्कार, भक्ति और मंत्र-साधना से जुड़ा भाव।
धर्म, भाग्य और ईश्वर से संबंध का मुख्य भाव।
नवांश कुंडली में वह ग्रह जो आत्मा की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
इन सभी तत्वों को मिलाकर यह देखा जाता है कि व्यक्ति किस देव-तत्व की ओर स्वाभाविक रूप से आकर्षित होगा।
यह एक सामान्य प्रश्न है। उत्तर स्पष्ट है — बिना जन्म कुंडली के इष्ट देव का सही निर्धारण संभव नहीं है।
राशि, नाम, या सामान्य ग्रह स्थिति से केवल अनुमान लगाया जा सकता है, लेकिन वह स्थायी और पूर्ण रूप से फलदायी नहीं होता। शास्त्रसम्मत विधि केवल कुंडली विश्लेषण ही है।
यहाँ एक भ्रम दूर करना आवश्यक है। किसी भी देवता की पूजा अशुभ नहीं होती, परंतु यदि पूजा व्यक्ति की आध्यात्मिक प्रकृति के अनुकूल न हो, तो:
अपेक्षित फल प्राप्त नहीं होते
पूजा में मन नहीं लगता
साधना लंबे समय तक टिक नहीं पाती
इष्ट देव की पूजा से ही स्थिरता और निरंतर फल प्राप्त होते हैं।
जब इष्ट देव का निर्धारण हो जाए, तब:
उसी देवता का मंत्र जप करें
पूजा की संख्या कम लेकिन नियमित रखें
दिखावे की बजाय श्रद्धा और नियम को प्राथमिकता दें
सरल, सात्त्विक और निरंतर पूजा ही सर्वोत्तम मानी जाती है।
इष्ट देव कोई कल्पना नहीं, बल्कि जन्म कुंडली में छिपा हुआ एक गूढ़ रहस्य है। सही इष्ट देव की पहचान होने पर व्यक्ति की आध्यात्मिक यात्रा सरल, स्थिर और फलदायी हो जाती है।
यदि आप जानना चाहते हैं कि आपके लिए किस भगवान की पूजा करना सबसे अधिक शुभ रहेगा, तो जन्म कुंडली का सही और शास्त्रीय विश्लेषण अनिवार्य है।